जब हम दो वस्तुओं (जैसे कांच की छड़ और रेशम) को आपस में रगड़ते हैं तो दोनों वस्तुएं आवेशित हो जाती हैं। परंतु इन दोनों वस्तुओं पर आवेश एक दूसरे से वितरित प्रकृति का होता है। एक वस्तु धनावेशित तथा दूसरी वस्तु ऋणावेशित हो जाती है। जैसा कि कांच की छड़ से इलेक्ट्रॉन निकलकर रेशम के टुकड़े में चले गए हैं इसलिए कांच की छड़ पर धनावेश तथा रेशम पर ऋणावेश आ जाता है क्योंकि ऋणावेशित परमाणु इलेक्ट्रॉन कांच की छड़ से निकल जाता है। यह हम जानते ही हैं कि इलेक्ट्रॉन पर ऋणात्मक आवेश होता है। इसी कारण कांच की छड़ पर धनात्मक आवेश आ जाता है।
Note- परमाणु में भाग लेने वाले इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन ही होते हैं। किंतु परमाणु के नाभिक में प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन ही रहते हैं। जबकि इलेक्ट्रॉन परमाणु की बाहरी कक्षा में घूमता रहता है। इलेक्ट्रॉन पर ऋणात्मक आवेश होता है तथा प्रोटोन पर धनात्मक आवेश होता है एवं न्यूट्रॉन पर कोई आवेश नहीं होता यह उदासीन होता है।
इलेक्ट्रॉन का आवेश = -e
प्रोटोन का आवेश = +e
α-कण का आवेश = +2e
आवेश को दो भागों में बांटा गया है।
(1) सजातीय आवेश (2) विजातीय आवेश
(1) सजातीय आवेश :-
इस प्रकार की आवेश एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं क्योंकि यह एक जैसी प्रकृति के आवेश होते हैं। जैसे (++ आवेश) या (– आवेश) ।
(2) विजातीय आवेश :-
इस प्रकार की आवेश एक दूसरे को आकर्षित करते हैं क्योंकि यह विपरीत प्रकृति के आवेश होते हैं। जैसे (+- आवेश) या (-+ आवेश) ।
मूल आवेश :-
मूल आवेश वह न्यूनतम आवेश है। जो किसी कण या वस्तु पर हो सकता है इसका मान 1.6×10-19 कूलाम होता है। जो की इलेक्ट्रॉन के आवेश के बराबर होता है। इसे ही मूल आवेश कहते हैं।
आवेश का क्वांटीकरण :-
किसी वस्तु पर आवेश की मात्रा e (इलेक्ट्रॉन) के पूर्व गुणज 1e, 2e या 3e हो सकती है 1.5e, 2.5e या 0.5e नहीं हो सकती है। इसे ही आवेश का क्वांटीकरण कहते हैं। आवेश के क्वांटीकरण में आवेश की मात्रा पूर्व होनी चाहिए।
आवेश का सूत्र :-
आवेश को (q) से प्रदर्शित किया जाता है।
आवेश = चक्करों की संख्या × इलेक्ट्रॉन का आवेश
q = ne
आवेश का मात्रक ‘कूलाम’ होता है।
विद्युत क्षेत्र में आवेश का सूत्र :-
आवेश = धारा × समय
q = it
विद्युत क्षेत्र :-
जब कांच की छड़ और रेशम को आपस में रगड़ते हैं। तो दोनों आवेशित हो जाते हैं। वह कारण जिससे कांच की छड़ और रेशम आवेशित होती हैं इसे ही विद्युत कहते हैं।
विद्युत क्षेत्र की तीव्रता :-
विद्युत क्षेत्र में किसी बिंदु पर रखें परीक्षण आवेश पर लगने वाले बल तथा परीक्षण आवेश के अनुपात उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता कहते हैं। विद्युत क्षेत्र की तीव्रता को E से प्रदर्शित करते हैं। एवं यह एक सदिश राशि है इसकी दिशा वही होती है जो धनावेश पर कार्यरत बल की दिशा होती है।
विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का सूत्र
विद्युत क्षेत्र की तीव्रता = \large \frac{बल}{परीक्षण आवेश(q_o)}
\footnotesize \boxed{E =\frac{F}{q_o}}
विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का मात्रक न्यूटन/कूलाम होता है एवं विमा [MLT-3A-1] होती है।
Note- परीक्षण आवेश(qo) – वह आवेश जो परीक्षण में प्रयोग होता है उसे परीक्षण आवेश कहते हैं इसे qo से प्रदर्शित करते हैं यह हमेशा धनात्मक आवेश होता है।
बिंदु आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता :-
माना एक बिंदु आवेश +q बिंदु o पर स्थित है। इससे r दूरी पर एक बिंदु P है जिस पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है। इसके लिए बिंदु P पर एक परीक्षण आवेश +qo रखते हैं। यदि इस पर लगने वाला बल F है। तो
विद्युत बल रेखाएं :-
इनके निम्न गुण हैं।
(i) विद्युत बल रेखाएं धनावेश से प्रारंभ होकर ऋणावेश पर समाप्त हो जाती हैं।
(ii) यदि आवेश एकल है तो विद्युत बल रेखाएं अनंत से प्रारंभ अथवा अनंत पर समाप्त हो सकती हैं।
(iii) विद्युत बल रेखाएं कभी भी एक-दूसरे को नहीं काटती क्योंकि यदि काटती है तो कटान बिंदु पर बल की दो दिशाएं होंगी जो असंभव है।
विद्युत द्विध्रुव :- इसको अलग पोस्ट में विस्तार पूर्वक तैयार किया गया है।
विद्युत फ्लक्स :-
विद्युत क्षेत्र में स्थित किसी पृष्ठ से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स उस पृष्ठ से गुजरने वाली विद्युत बल रेखाओं की संख्या की माप है। विद्युत फ्लक्स को ΦE से प्रदर्शित करते हैं।
किसी विद्युत क्षेत्र E के कारण किसी सतह A से बद्ध विद्युत फ्लक्स
ΦE = \overrightarrow{E}•\overrightarrow{A}
यदि विद्युत बल रेखाएं θ कोण बनाती हैं। तो विद्युत फ्लक्स
ΦE = EA cosθ
Note- यदि किसी बंद पृष्ठ से कुल विद्युत फ्लक्स भीतर प्रविष्ट हो रहा है तो विद्युत फ्लक्स ऋणात्मक होता है। अथवा यदि कुल विद्युत फ्लक्स सतह से बाहर जा रहा है। तो विद्युत फ्लक्स धनात्मक होगा।
गौस की प्रमेय :- चैप्टर वन में से गौस की प्रमेय के अनुप्रयोग से एक प्रशन जरूर आता है।
