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मेवाड़ - राजस्थान का इतिहास
भौगोलिक विस्तार
- चित्तौड़गढ़
- राजसमंद
- भीलवाड़ा
- उदयपुर
- प्रतापगढ़
मेवाड़ के प्राचीन नाम
- मैनपाट (मेव मेर मेद जाति के कारण)
- प्राग वाट (पहाड़ी क्षेत्र)
- शिवि जनपद
गुहिल वंश
- सूर्यवंशी हिंदू
- 24 शाखाएं - मेवाड़, वागड़, चाकसू/चाटसू, कल्याणपुर, महाराष्ट्र, नेपाल
सामोली अभिलेख
- यह उदयपुर के पास में मिला है।
- शिलादित्य के बारे में जानकारी मिलती है इसमें ।
- वटनगर ( बसंतगढ़ ) की महाजन समुदाय ( बनिए ) के महंतर ( प्रमुख ) ने समुदाय के कहने पर अरण्यवासिनी (जावर माता) का मंदिर बनवाया व स्वयं देव बुक नामक स्थान पर अग्नि में प्रवेश कर लेता है ।
- 1869 में आगरा के पास 2000 चांदी के सिक्के मिले जिन पर श्री गुहिल नाम लिखा था ।
इतिहासकारों की कहानियां
- जेम्स टॉड ने गुजरात के वडनगर के शिलादित्य और पुष्पावती का पुत्र बताया
- अबुल फजल ने ईरान के नौशेरवा खान आदिल के वंशज बताया