राणा लाखा ( लक्षसिंह ) (1382 - 1421 ई. ) - मेवाड़ का इतिहास

  •  जावर उदयपुर में चांदी की खान प्राप्त हुई ।
  • एक बंजारे ने पिछोला उदयपुर जेल का निर्माण करवाया (बंजारे - घुमक्कड़ व्यापारी )
  • कुंभा हाडा नकली बूंदी की रक्षा करते हुए मारा गया था ।
  • मारवाड़ के चुंडा ने अपनी बेटी हंसा बाई की शादी मेवाड़ के राणा लाखा से की ।
  • मेवाड़ के राणा लाखा के पुत्र चुंडा ने प्रतिज्ञा ली कि वह मेवाड़ का अगला राजा नहीं बनेगा बल्कि हंसा बाई के पुत्र को राजा बनाएगा इसलिए चुंडा को मेवाड़ का भीष्म भी कहा जाता है ।





चुंडा के त्याग के कारण दिए गए विशेष अधिकार

  1. मेवाड़ के 16 ठिकानों में से प्रथम श्रेणी के 4 ठिकाने दिए गए इनमें सलूंबर ( उदयपुर ) भी शामिल था जो मेवाड़ का सबसे बड़ा ठिकाना था ।
  2. सलूंबर का सामंत मेवाड़ के राजा का राजतिलक करेगा ।
  3. सलूंबर का सामंत मेवाड़ की सेना का सेनापति होगा ।
  4. मेवाड़ के सभी राज्य पत्रों पर राणा के साथ सलूंबर का सामंत भी हस्ताक्षर करेगा ।
  5. राणा की अनुपस्थिति में सलूंबर का सामंत राजधानी को संभालेगा ।




हरावल - सेना का अगला भाग 

चंदावल - सेना का पिछला भाग

Previous Post
Next Post
Related Posts