हम्मीर ( 1326 - 1364 ई.) - मेवाड़ का इतिहास

  1. 5यह सिसोदा राजसमंद का सामंत था । यहां से गुहील वंश के सिसोदिया शाखा का प्रारंभ जिससे राणा की उपाधि मिली ।
  2. 1326 ईस्वी में मालदेव सोनगरा के पुत्र बनवीर/जैसा को हराकर चित्तौड़ पर अधिकार कर लेता है ।
  3. सिंगोली बांसवाड़ा के युद्ध में मोहम्मद बिन तुगलक को हराया ।
  4. कर्नल जेम्स टॉड ने इसे प्रबल हिंदू कहा है ।
  5. कुंभलगढ़ प्रशस्ति में इसे विषम घाटी पंचानन कहा गया है ।
  6. रसिकप्रिया में इससे वीर राजा तथा मेवाड़ का उद्धारक भी कहा जाता है ।
  7. इसने चित्तौड़ में बरवाडी ( अन्नपूर्णा ) माता का मंदिर बनवाया ( मेवाड़ के गुहिल वंश की ईष्ट देवी ) ।


( बाण माता - कुलदेवी )




सिसोदा रावल करणसिंह / रण सिंह के समय राहप को दिया गया राहप के वंशज लक्ष्मण सिंह अपने पुत्र (6 पुत्र) अमर सिंह हमीर के पिता के साथ चित्तौड़ के प्रथम शाखा में वीरगति को प्राप्त हुए हम्मीर के चाचा अजय सिंह ने हम्मीर को सिसोदा का सामंत बनाया अजय सिंह के पुत्र सज्जन सिंह दक्षिण भारत में चले गए तथा शिवाजी महाराज उन्हीं के वंशज है ।





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