- यह रायमल का बेटा था ।
- अपने भाइयों से विवाद होने के बाद सांगा श्रीनगर ( अजमेर ) में करमचंद पवार के पास शरण ली ।
- रायमल की मृत्यु के बाद सांगा मेवाड़ का राजा बना ( 5 मई 1509 ) ।
- जिस समय सांगा राजा बना उस समय दिल्ली में सिकंदर लोदी, गुजरात में महमूद शाह बेगड़ा और मालवा में नासिर शाह का राज था ।
दिल्ली v/s सांगा
- सांगा ने दिल्ली के इब्राहिम लोदी से युद्ध लड़े ।
- सांगा और इब्राहिम लोदी के मध्य प्रथम युद्ध 1517 में खातोली ( कोटा ) में हुआ तथा दूसरा युद्ध 1518 ईस्वी में बाड़ी ( धौलपुर ) में हुआ ।
- इन दोनों युद्धों में सांगा जीत गया था।
मालवा V/S सांगा
संघर्ष के कारण
- सांगा उत्तरी भारत में प्रभाव स्थापित करना चाहता था इसके के लिए मालवा पर अधिकार आवश्यक था ।
- मालवा की आंतरिक स्थिति कमजोर थी जो सांगा के लिए अनुकूल अवसर थी ।
- चंदेरी की मोदीनिराय ने सांगा से महमूद खिलजी द्वितीय के खिलाफ सहायता मांगी थी
गागरोन का युद्ध 1519
सांगा V/s महमूद खिलजी द्वितीय
- इस समय गागरोन का किला चंदेरी ( मालवा ) के राजा मोदीनिराय के पास था ।
- सांगा जीत गया ।
- हरिदास चारण ने महमूद खिलजी द्वितीय को गिरफ्तार कर लिया इसलिए सांगा ने उसे 12 गांव दिए थे ।
- मुस्लिम लेखक निजामुद्दीन के अनुसार लड़ाई में फतह पाने के बाद दुश्मन को गिरफ्तार कर के पीछे उसका राज्य दे देना यह काम आज तक मालूम नहीं किसी दूसरे ने किया है ।
गुजरात V/s सांगा
संघर्ष के कारण
- सांगा के राज्य विस्तार की नीति ।
- कुम्भा समय से मेवाड़ गुजरात के मध्य संघर्ष चल रहा था ।
- गुजरात के मुजफ्फरशाह द्वितीय ने सांगा के खिलाफ महमूद शाह खिलजी द्वितीय की सहायता की थी ।
- नागौर का मुस्लिम राज्य सांगा का करद था तथा गुजरात का सुल्तान उसे स्वतंत्र करना चाहता था ।
- तत्कालीन कारण : इधर का उत्तराधिकार संघर्ष
- ईडर ( गुजरात ) में भारमल व रायमल के बीच उत्तराधिकार का संघर्ष चल रहा था जिसमें मुजफ्फरशाह द्वितीय ने भारमल व सांगा ने रायमल का साथ दिया सांगा ने भारमल व मुजफ्फर शाह द्वितीय को हरा दिया
बयाना भरतपुर का युद्ध ( 16 फरवरी 1527 ईसवी )
बाबर ( अफगानिस्तान ) V/s सांगा
- इस समय बयाना का किला मेहंदी ख्वाजा के पास था ।
- बाबर का सेनापति सुल्तान मिर्जा सांगा जीत गया
खानवा का युद्ध ( भरतपुर ) (17 मार्च 1527)
- बाबर ने युद्ध से पहले जिहाद की घोषणा की ।
- बाबर ने शराब नहीं पीने की प्रतिज्ञा की ।
- बाबर ने मुस्लिम व्यापारियों का तमगा कर समाप्त कर दिया ।
- राणा सांगा ने राजस्थान के सभी राजाओं को पत्र भेजे और सहायता मांगी
- आमिर - पृथ्वीराज
- मारवाड़ - मालदेव ( राजा - गांगा)
- बीकानेर - कल्याणमल्ल ( राजा - जैतसी)
- मेड़ता - वीरमदेव
- सिरोही - अखेराज देवड़ा
- चंदेरी - मोदीनिराय
- ईडर - भारमल
- देवलिया (प्रतापगढ़ ) - बाग सिंह
- सादड़ी ( चित्तौड़ ) - झाला अज्जा
- वागड़ - उदय सिंह
- सलूंबर - रतन सिंह चुंडावत
- मेवात ( अलवर ) - हसन खान मेवाती
- महमूद - लोदी इब्राहिम लोदी का भाई
- सांगा घायल होने के कारण झाला अज्जा सादड़ी ने नेतृत्व किया ।
- बाबर जीत गया उसने गाजी की उपाधि धारण कर ली ।
- सांगा का इलाज बसवा ( दौसा ) में किया गया ।
- इरिच ( यूपी ) में सांगा के साथियों ने सांगा को जहर दे दिया ।
- कालपी ( यूपी ) में सांगा की मृत्यु हो गई ।
- मांडलगढ़ ( भीलवाड़ा ) में सांगा की छतरी बनी हुई है
सांगा की हार के कारण
- राणा सांगा की सेना में एकता की कमी थी ।
- उसकी सेना अलग-अलग सेनापतियों के नेतृत्व में लड़ रही थी ।
- बाबर का तोपखाना ।
- बाबर की तुलगुमा युद्ध प्रणाली ( तीन तरफ से आक्रमण ) ।
- बयाना के युद्ध के बाद बाबर को युद्ध की तैयारी करने के लिए प्राप्त समय दे देना ।
- सांगा खुद युद्ध के मैदान में चला गया ।
- सांगा के कई साथियों ने विश्वासघात किया और युद्ध के समय बाबर से जा मिले ( उदाहरण के लिए रायसेन ( MP ) का सलहदी कवर व नागौर के खानजादे मुस्लिम ) ।
- मुगल सेना ने घोड़ों का प्रयोग किया जबकि राजपूत सेना ने हाथी का ।
- राजपूत सैनिकों की अपेक्षा मुगलों के हथियार हल्के थे ।
खानवा युद्ध का महत्व
- राजपूतों को हराने के बाद बाबर का भारत में राज करना आसान हो गया ।
- खानवा अंतिम युद्ध जिसमें राजस्थान के राजपूत राजाओं में एकता देखी गई थी ।
- सांगा अंतिम राजपूत राजा था जिसने दिल्ली को चुनौती देने का प्रयास किया था ।
- राजपूतों की सामरिक कमजोरी उजागर हो गई ।
- सांगा के बाद कोई बड़ा राजा नहीं बचा जिससे हिंदू कला व संस्कृति को नुकसान पहुंचा ।
- खानवा के युद्ध के बाद मुगलों ने मुगलों में राजपूतों के प्रति भविष्य की नीति का निर्धारण हुआ ( उदाहरण के लिए कालांतर में अकबर ने संघर्ष के स्थान पर मित्रता की नीति अपनाई । )
सांगा की उपाधियां
- हिंदूपत
- सैनिकों का भग्नावशेष ( 80 घाव )
- बाबरनामा के अनुसार सांगा के दरबार में 7 राजा, 9 राव व 104 सरदार थे ।
