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महाराणा विक्रमादित्य ( 1531 - 1536 ) - मेवाड़ का इतिहास
महाराणा विक्रमादित्य ( 1531 - 1536 ) - मेवाड़ का इतिहास
- पिता - राणा सांगा
- माता - कर्मावती ( हाड़ी रानी - बूंदी )
- संरक्षक - कर्मावती
- 1533 में गुजरात के बहादुरशाह ने मेवाड़ पर आक्रमण किया कर्मावती ने रणथंभोर का किला देकर संधि कर ली थी ।
- 1534 - 35 ईसवी में पुनः बहादुर शाह ने आक्रमण किया ।
- कर्मावती ने मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजी और सहायता मांगी थी ।
- 1535 में मेवाड़ का दूसरा साखा हुआ रानी कर्मावती ने जोहर और देवलिया ( प्रतापगढ़ ) के बाघ सिंह ने केसरिया किया था ।
- बाघ सिंह की छतरी पांडुपोल ( चितौड़ गढ़ ) में बनी हुई है ।
- 1535 ई. के पुरताम्रपत्र से कर्मावती के जोहर की जानकारी मिलती है ।
बाग सिंह ने खानवा के युद्ध में भी भाग लिया था ।- बनवीर को मेवाड़ का शासक बनाया गया ।
- बनवीर उड़ना राजकुमार पृथ्वीराज की दासी का पुत्र था ।
- बनवीर ने विक्रमादित्य की हत्या कर दी थी
- वह उदय सिंह को भी मारना चाहता था लेकिन पन्नाधाय ने अपने पुत्र चंदन का बलिदान देकर को बचा लिया ।
- कुंभलगढ़ आशा देवपूरा ने पन्नाधाय व उदयसिंह को शरण दी ।