अल्लट - मेवाड़ का इतिहास

 अन्य नाम 

आलुरावल



  • इन्होंने आहङ को अपनी दूसरी राजधानी बनाया था वहां वराह (विष्णु) मंदिर का निर्माण कराया एवं मेवाड़ में नौकरशाही (प्रशासनिक व्यवस्था) की स्थापना की । (सारणेश्वर प्रशस्ति के अनुसार)
  • आटपुर (आहड़) से प्राप्त शक्ति कुमार के अभिलेख (977 A.D.) के अनुसार अल्लट की माता महालक्ष्मी राठौर (राष्ट्रकूट) वंश की थी तथा पत्नी हरिया देवी हूण राजकुमारी थी हरिया देवी ने हर्ष पुर नाम के गांव की स्थापना की थी


सारणेश्वर प्रशस्ति

  • यह प्रशस्ति उदयपुर के सारणेश्वर से प्राप्त पहले आहड़ के वराह मंदिर में स्थित थी । 
  • इसमें अल्लट की माता महालक्ष्मी, उसकी पत्नी हरिया देवी, उसके पुत्र नरवाहन तथा स्वयं अल्लट के बारे में जानकारी प्राप्त होती है ।
  • इसमें अल्लट अधिकारियों के नाम पद सहित उल्लेखित हैं । 
  • वराह मंदिर के गोष्ठिको (चंदा देने वाले) की नामावली भी है । 
  • तत्कालीन कर प्रणाली तथा मंदिर के निर्वाह व्यवस्था की जानकारी मिलती है । 
  • उस समय आहट में कर्नाटक, मध्यप्रदेश, पलाट ( गुजरात ) टक्क (पंजाब) के व्यापारी भी रहते थे ।





जैत्रसिंह 

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