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राणा भीमसिंह (1784-1824 ई.) - मेवाड़ का इतिहास
- राणा भीमसिंह ने अपनी पुत्री कृष्णकुमारी का विवाह मारवाड़ के शासक भीमसिंह के साथ तय किया। दुर्भाग्यवश शादी से पहले ही मारवाड के भीमसिंह की मृत्यु हो गयी। भीमसिंह की मृत्यु उपरांत कृष्णाकुमारी का विवाह आमेर के जगतसिंह द्वितीय के साथ तय किया गया। मारवाड़ के नये शासक मानसिंह ने भीमसिंह के भ्राता होने के कारण इस संबंध का विरोध किया ।
- इस घटना के कारण आमेर एवं मारवाड़ रियासत परस्पर विरोधी हो गयी एवं 1807 ई. में जगतसिंह द्वितीय एवं मानसिंह के मध्य गिंगोली का युद्ध (परबतसर का युद्ध हुआ ।
- लम्बे समय तक चले इस युद्ध में दोनों ही पक्षों में भयंकर खून-खराबा हुआ।
गिंगोली (परबतसर) का युद्ध (नागौर)-1807
- जगत सिंह द्वितीय (जयपुर) V/S मानसिंह (जोधपुर)
- अमीर खाँ पिंडारी (टोंक) तथा अजीत सिंह चुण्डावत (सलूम्बर) के कहने पर कृष्णाकुमारी को जहर देकर इस विवाद का अन्त किया गया। (21 जुलाई 1810 ई.)
- 13 जनवरी 1818 ई. में भीमसिंह अंग्रेजों के साथ संधि कर लेता है। इस सन्धि में अंग्रेजों का प्रतिनिधि चार्ल्स मेटकॉफ तथा मेवाड का प्रतिनिधि अजीत सिंह था। कर्नल जेम्स टॉड को मेवाड का प्रथम पॉलिटिकल एजेन्ट बनाया गया।